Ramchandra shukla biography in hindi. आचार्य रामचंद्र शुक्ल जीवन परिचय 2019-02-17

Ramchandra shukla biography in hindi Rating: 9,5/10 1263 reviews

हिन्दी साहित्य का इतिहास: History of Hindi Literature by Ramachandra Shukla

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In the meantime, he became famous for his great writings, people has started to like his writings. Before he did his high school at London Mission School he learned , and at his house by qualified teachers and then for further study he came to and continued his study; after that he wrote and published his valuable literature works and his experienced information. He was typical of those Indians who engaged with the Western institutions and learning: They refused to leave authority over religion to who were traditionally educated. He was the editor of the Nagiri Pracharini Patrika. Acharya Ram Chandra Shukla was born on 4 October 1884 to Chandrabali Shukla in a small village—Agona, , Uttar Pradesh—during British rule over India. Some of his great writing such as, the Kavita Kya Hai was of legendary criticism and Chintamani was the most expansively read essay identifying the poetry and poetics.

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Acharya Pandit Ramchandra Shukla: Biography, Books, Essays

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The poet asserts the importance of using mother tongue as a medium of instruction—conversational and educational. Some of the other essays related to the Chintamani are Chintamani Aalochanatamak Nibandh, Chintamani Bhag—1 Vicharatmak and Chintamani Bhag—1 Alochnatmak. Its first secretary, , published a regular journal Naya Mandand which established a reputation for its special numbers on women, postmodernism, Dalit Sahitya, among others. In his assessment of Shukla Acharya Ramchandra Shukla aur Hindi Alochana eminent critic Dr. Many of his Sahityic essays have been published in the Saraswati and honored by the sahitya lovers. He got married to the Savitri Devi and became father of the two sons and three daughters Keshav Chandra, Gokul Chandra and Vidhya, Durgavati, Kamla.

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रामचन्द्र शुक्ल की जीवनी Ramchandra Shukla Biography In Hindi

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In the year 1941, he got died because of the heart attack. Acharya Shukla taught at and chaired its department of Hindi during 's period from 1937 until he died 1941. Acharya Ram Chandra Shukla was born on 4 October 1884 to Chandrabali Shukla in a small village — Agona, , Uttar Pradesh — during British rule over India. It was built on the wish of his son Gokul Chandra Shukla and on the land provided by the Varanasi local authority. But he was interested in the sahitya instead of the Law.

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Ramchandra Shukla

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The entire package was soaking wet inside and out. In developing a scientific methodology to investigate the literary works of several centuries as creations of socio-economic and political conditions of the respective era, Acharya Shukla became a pathbreaker. His works of literary criticism include Kavita Kya Hai, the most widely read essay explaining poetry and poetics in his outstanding collection Chintamani, published initially in two volumes as a collection of essays on emotions like and hatred. After him, Hindi poetry was then developed by the Buddhist and Nath schools as well as the medieval involvements of the Amir Kabirdas, Khusro, , , and again it was expanded to the modern realism by the Nirala and. New Delhi: National Book Trust. He was a member of the family of belonging to the community and his home there is still in use.

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Ramchandra Shukla

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Without the knowledge of the mother tongue, there is no cure for the pain of heart. Later he has worked at the Banaras Hindu University as a Hindi teacher. Finally he has been sent by his father to get the education of Law to the Allahabad. His father Chandrabali Shukla was a prestigious Kanoongo at that time. Keeping in the spirit of , in 1921, he wrote Non-co-operation and Non-mercantile Classes of India which was an attempt to look at the struggle of Indian classes in the set up of colonial and semi-feudal economy. रामचन्द्र शुक्ल का जन्म 4 अक्टूबर 1884 को बस्ती अगोना गाँव, ज़िला बस्ती, उत्तरप्रदेश में हुआ था। 1898 में आपने मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की व 1901 में मिर्ज़ापुर से एंट्रेंस की। आपकी एफ० ए० व मुख़्तारी की पढ़ाई पूरी ने हो सकी। आपने अपनी पहली नौकरी 1904 में मिशन स्कूल में ड्रांइग मास्टर के रूप में की। आपने आनंद कादंबनी का संपादन भी लिया। 1908 में आप नागरी प्रचारणी सभा के हिंदी कोश के लिए सहायक संपादक के रूप में काशी गए। 1919 में आप हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यापन करने लगे व 1937 में हिन्दी विभागाध्यक्ष बने। आप बीसवीं शताब्दी के हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार हैं। आप एक समीक्षक, निबन्ध लेखक एवं साहित्यिक इतिहासकार के रूप में जाने जाते हैं। शुक्लजी ने हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखा, जिसमें काव्य प्रवृत्तियों एवं कवियों के परिचय के अतिरिक्त समीक्षा भी दी गई है। दर्शन के क्षेत्र में भी आपकी 'विश्व प्रपंच' उपलब्ध है। यह पुस्तक 'रिडल ऑफ़ दि यूनिवर्स' का अनुवाद है परंतु इसकी विस्तृत भूमिका आपका मौलिक लेखन है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष के पद पर रहते हुए ही 1941 में हृदय गति रूकने से आपकी मृत्यु हो गई। आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं - हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी शब्द सागर, चिंतामणि व नागरी प्रचारिणी पत्रिका। हिंदी की पहली कहानी कौनसी है, यह आज भी चर्चा का विषय है। विभिन्न कहानियाँ 'पहली कहानी' होने की दावेदार रही हैं। आज भी इसपर चर्चा-परिचर्चा होती है। सयैद इंशाअल्लाह खाँ की 'रानी केतकी की कहानी', राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद की लिखी 'राजा भोज का सपना' किशोरीलाल गोस्वामी की 'इंदुमती', माधवराव स्प्रे की 'एक टोकरी भर मिट्टी', आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 'ग्यारह वर्ष का समय' व बंग महिला की ''दुलाई वाली' जैसी अनेक कहानियाँ हैं जिन्हें अनेक विद्वानों ने अपना पक्ष रखते हुए हिंदी की सर्वप्रथम कहानी कहा है।.

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Bharatendu Harishchandra

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Its articles and research papers are acclaimed in Hindi and Indian languages literature. Mukta, a famous author of Hindi stories. After the death of Kusum Chaturvedi, a litterateur of repute, Gyan Datta Chaturvedi became the secretary. But all is well now, and I am relieved. Acharya Shukla taught at and chaired its department of Hindi during 's period from 1937 until he died 1941. An occasionally publishing journal of Hindi by this institute is, The Naya Mandand in the editorship of the Kusum Chaturvedi. Masterpieces of Indian literature, Volume 1.

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल जीवन परिचय

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Known for Codifier of the history of literature in a scientific system. Hindi Sahitya ka Itihaas is considered as authentic Hindi literature. The Ministry of Information and Broadcasting of India gives Bharatendu Harishchandra Awards since 1983 to promote original writings in Hindi. Bharatendu Harishchandra Born 1850-09-09 9 September 1850 , , Died 6 January 1885 1885-01-06 aged 34 , , Pen name Rasa Occupation Novelist, poet, playwright Bhartendu Harishchandra 9 September 1850 — 6 January 1885 is known as the father of modern as well as. It was built on the wish of his son Gokul Chandra Shukla and on the land provided by the Varanasi local authority. भारत के इतिहास में बहुत से प्रमुख और महान इतिहासकार और साहित्यकार थे जिनकी रचनाओं की चर्चा आज भी की जाती हैं इन्ही में से एक रचनाकार का नाम था आचार्य रामचंद शुक्ल वे भारत के बीसवीं सदी के जाने माने साहित्यकार, रचनाकार ,कथाकार और कवी थे वे हिंदी वैधानिक के बहुत बड़े आलोचक थे हिंदी पाठ वैधानिक की आलोचना उन्ही के द्वारा हुई थी आज इस पोस्ट के द्वारा हम आपको आचार्य रामचंद्र शुक्ल की रचनाएँ ,आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और हिन्दी आलोचना ,आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध उत्साह ,रामचंद्र शुक्ल की कविता , acharya ramchandra shukla wikipedia in hindi और राम शुक्ल के जीवन परिचय के बारे में जानकारी देंगे यह भी देंखे : आचार्य रामचंद्र शुक्ल जीवनी आचार्य रामचंद का जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में 8 अक्टूबर 1884 में हुआ था इनके गांव का नाम अगोना था आचार्य रामचंद्र शुक्ल की माता का नाम विभाषी और पिता का नाम चन्द्रबली शुक्ल था उनकी नियुक्ति सदर कानूनगो के पद पर होने की वजह से वे सेह परिवार के साथ मिर्ज़ापुर में बस गए जब रामचंद्र 9 वर्ष के थे तभी उनकी माता का स्वास्थ खराब होने के कारण देहांत हो गया बाल काल में माँ की मृत्यु की दुःख की वजह से वनके मन के विचारो में बदलाव आ गया अध्यन के प्रति उनकी रूचि बचपन से ही थी परन्तु इसके लिए उनके घर का वातावरण अनुकूल था Acharya Ramchandra Shukla History In Hindi उन्होंने लन्दन मिशन स्कूल से अच्छे नंबर लाकर अपनी शिक्षा प्राप्त की उनका बचपन से ही मन साहित्यकार और रचनाकार बन्ने का था परन्तु उनके पिताजी कुछ और ही चाहते थे वो रामचंद्र जी को तहसील में दफ्तर में बैठकर काम करते देखना चाहते थे आचार्य जी की तहसील की नौकरी में बिलकुल भी रूचि नहीं थी उनके पिता जी ने उन्हें पढ़ने के लिए इलाहाबाद भेज दिया परन्तु कम रूचि के चलते वे पूरी परीक्षाओ में अनुत्तीर्ण रहे उन्होंने १९०३ से लेकर १९०८ साल तक आनन्द कादम्बिनी में सहायक सम्पादक के रूप में काम किया वे लन्दन मिशन स्कूल में ड्रॉइंग के अध्यापक भी रहे उनके लेख पत्रिकाओं में भी छपते थे जिसकी वजह से उनका नाम पुरे साहित्य जगत में मशहूर हो गया वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक के पद पर नियुक्त हुए सन 2 फरवरी 1941 में उनके हृदय के रोग की वजह से निधन हो गया 2006 में दिल्ली की विश्व पुस्तक समारोह में उनकी साहित्यो की एक पुस्तक की रचना की यह भी देंखे : हिन्दी साहित्य का इतिहास रामचन्द्र शुक्ल आचार्य रामचंद शुक्ल की सबसे प्रचलित साहित्य का नाम हिंदी साहित्य का इतिहास था इनकी यह साहित्य रचना आज के समय में भी बहुत प्रचलित हैं इसमें उन्होंने हिंदी साहित्य के पुरे इतिहास के बारे में निबंध और कविता के रूप में वर्णन किया हैं इसमें उन्होंने हिंदी इतिहास के सभी प्रचलित कवि और रचनाकारो के बारे में और उन की कविता और रचनाओं का विस्तार से वर्णन किया हैं.

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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन परिचय

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To enrich the worldview of Hindi speakers, Acharya Shukla translated 's into Buddha Charit A biography of in Brij Bhasha verse and German scholar 's famous work The Riddles of Universe into Vishwa Prapanch where he added his own thought-provoking preface by comparing its findings with Indian philosophical systems. Keeping in the spirit of , in 1921, he wrote Non-co-operation and Non-mercantile Classes of India which was an attempt to look at the struggle of Indian classes in the set up of colonial and semi-feudal economy. He wrote under the pseudonym Girdhar Das. He has given his own emotions, feelings as well as his great views in his writings. Biography The work of Shukla traces the genesis of Hindi poetry and since the 6th century and its development through Buddhist and Nath schools and the contributions of , , , , stretching to the modern realism of and. At the time when he lost his mother, he was just of 9. Mukta, a famous author of Hindi stories.

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